हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत "नहजुल बलाग़ा" किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امیرالمؤمنین علی علیهالسلام:
وَاعْلَمْ یَا بُنَیَّ أَنَّ الرِّزْقَ رِزْقَانِ: رِزْقٌ تَطْلُبُهُ، وَرِزْقٌ یَطْلُبُکَ، فَإِنْ أَنْتَ لَمْ تَأْتِهِ أَتَاکَ.
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने फ़रमाया:
"ऐ मेरे बेटे! जान लो कि रोज़ी दो प्रकार की होती है। एक वह रोज़ी है जिसे तुम तलाश करते हो, और दूसरी वह रोज़ी है जो तुम्हें तलाश करती है। यदि तुम उसके पास न भी जाओ, तो वह स्वयं तुम्हारे पास आ जाएगी।"
नहजुल बलाग़ा, पत्र संख्या 31।
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